Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 18.2.23: आगे जाकर उसने उबलते हुए जल से भरी एक नदी बहती देखी, जिसे पार करना बहुत कठिन था। दूसरी ओर असिपत्र नामक एक वन था, जो तीखी तलवारों या कटारों के समान तीखे पत्तों से भरा हुआ था॥ 23॥ | mahabharat अध्याय 18.2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना । mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आगे जाकर उसने उबलते हुए जल से भरी एक नदी बहती देखी, जिसे पार करना बहुत कठिन था। दूसरी ओर असिपत्र नामक एक वन था, जो तीखी तलवारों या कटारों के समान तीखे पत्तों से भरा हुआ था॥ 23॥
Going further, he saw a river full of boiling water flowing, crossing which was very difficult. On the other side was a forest called Asipatra, full of sharp leaves like sharp swords or daggers.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥