Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 18.2.20: लोहे जैसी चोंच वाले कौवे और गिद्ध जैसे पक्षी इधर-उधर मंडरा रहे थे। सुइयों जैसे तीखे और विंध्य पर्वत जैसे विशाल मुखों वाले भूत-प्रेत हर जगह विचरण कर रहे थे। | mahabharat अध्याय 18.2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना । mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
लोहे जैसी चोंच वाले कौवे और गिद्ध जैसे पक्षी इधर-उधर मंडरा रहे थे। सुइयों जैसे तीखे और विंध्य पर्वत जैसे विशाल मुखों वाले भूत-प्रेत हर जगह विचरण कर रहे थे।
Birds like crows and vultures with iron-like beaks were hovering around. Ghosts with faces as sharp as needles and as huge as the Vindhya mountains were roaming around everywhere.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥