श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  18.2.2-3 
जुहुवुर्ये शरीराणि रणवह्नौ महारथा:।
राजानो राजपुत्राश्च ये मदर्थे हता रणे॥ २॥
क्व ते महारथा: सर्वे शार्दूलसमविक्रमा:।
तैरप्ययं जितो लोक: कच्चित् पुरुषसत्तमै:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वे सब सिंहों के समान पराक्रमी योद्धा, जिन्होंने युद्ध की अग्नि में अपने शरीरों की आहुति दे दी थी, वे राजा और राजकुमार, जो रणभूमि में मेरे लिए मर गए थे, अब कहाँ हैं? क्या उन पराक्रमी योद्धाओं ने इस स्वर्ग को भी जीत लिया है?॥2-3॥
 
Where are all those mighty warriors like lions who sacrificed their bodies in the fire of war, those kings and princes who died for me on the battlefield? Have those mighty warriors also conquered this heaven?॥2-3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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