श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  18.2.16 
अग्रतो देवदूतश्च ययौ राजा च पृष्ठत:।
पन्थानमशुभं दुर्गं सेवितं पापकर्मभि:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
देवदूत आगे-आगे जा रहा था और राजा युधिष्ठिर उसके पीछे-पीछे चल रहे थे। वे दोनों एक ऐसे दुर्गम मार्ग पर पहुँचे जो अत्यंत अशुभ था। उस पर केवल पापी लोग ही यातनाएँ भोगने के लिए यात्रा करते थे॥16॥
 
The angel was going ahead and King Yudhishthira was following him. Both of them reached a difficult path which was very inauspicious. Only sinful people used to travel on it to suffer torture.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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