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श्री महाभारत
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पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व
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अध्याय 1: स्वर्गमें नारद और युधिष्ठिरकी बातचीत
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श्लोक 11
श्लोक
18.1.11
नैवमित्यब्रवीत् तं तु नारद: प्रहसन्निव।
स्वर्गे निवासे राजेन्द्र विरुद्धं चापि नश्यति॥ ११॥
अनुवाद
यह सुनकर नारद जी ने मुस्कुराते हुए उससे कहा, 'नहीं, नहीं, ऐसा मत कहो; स्वर्ग में रहने से पूर्व का वैर शांत हो जाता है। ॥11॥
Hearing this, Narada ji smilingly said to him, 'No, no, don't say that; the previous enmity gets pacified after living in heaven. ॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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