Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 17.3.7: युधिष्ठिर बोले, "हे भूत और वर्तमान के स्वामी देवराज! यह कुत्ता मेरा परम भक्त है। इसने सदैव मेरा साथ दिया है; अतः इसे मेरे साथ चलने का आदेश दीजिए, क्योंकि मेरी बुद्धि में क्रूरता नहीं है।" | mahabharat अध्याय 17.3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना । mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
अयं श्वा भूतभव्येश भक्तो मां नित्यमेव ह।
स गच्छेत मया सार्धमानृशंस्या हि मे मति:॥ ७॥
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "हे भूत और वर्तमान के स्वामी देवराज! यह कुत्ता मेरा परम भक्त है। इसने सदैव मेरा साथ दिया है; अतः इसे मेरे साथ चलने का आदेश दीजिए, क्योंकि मेरी बुद्धि में क्रूरता नहीं है।"
Yudhishthira said, "O Lord of the past and the present, Devraj! This dog is my great devotee. It has always supported me; hence, order it to accompany me as my intellect lacks cruelty."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥