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mahabharat 17.3.35: हे मनुष्यों के स्वामी! क्या अब भी आप मानवीय भावनाओं से प्रभावित हो रहे हैं? हे राजन! यह स्वर्ग है। इन स्वर्गीय ऋषियों और सिद्धों का दर्शन कीजिए।॥35॥   |   mahabharat अध्याय 17.3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व  »  अध्याय 3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  17.3.35 
अद्यापि मानुषो भाव: स्पृशते त्वां नराधिप।
स्वर्गोऽयं पश्य देवर्षीन् सद्धांश्च त्रिदिवालयान्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! क्या अब भी आप मानवीय भावनाओं से प्रभावित हो रहे हैं? हे राजन! यह स्वर्ग है। इन स्वर्गीय ऋषियों और सिद्धों का दर्शन कीजिए।॥35॥
 
O Lord of men! Are you still being touched by human feelings? O King! This is heaven. Have a look at these heavenly sages and Siddhas.'॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)