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mahabharat 17.3.32: राजा के वचन सुनकर भगवान इन्द्र ने कोमल वाणी में युधिष्ठिर से कहा-॥32॥   |   mahabharat अध्याय 17.3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व  »  अध्याय 3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  17.3.32 
राज्ञस्तु वचनं श्रुत्वा देवराज: पुरंदर:।
आनृशंस्यसमायुक्तं प्रत्युवाच युधिष्ठिरम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
राजा के वचन सुनकर भगवान इन्द्र ने कोमल वाणी में युधिष्ठिर से कहा-॥32॥
 
After listening to the king's words, Lord Indra spoke to Yudhishthira in a soft voice -॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)