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mahabharat 17.3.30: नारदजी के वचन सुनकर धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर ने देवताओं तथा अपने पक्ष के राजाओं से अनुमति लेकर कहा-॥30॥   |   mahabharat अध्याय 17.3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व  »  अध्याय 3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  17.3.30 
नारदस्य वच: श्रुत्वा राजा वचनमब्रवीत्।
देवानामन्त्र्य धर्मात्मा स्वपक्षांश्चैव पार्थिवान्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
नारदजी के वचन सुनकर धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर ने देवताओं तथा अपने पक्ष के राजाओं से अनुमति लेकर कहा-॥30॥
 
After listening to Narada's words, the righteous king Yudhishthira, after taking permission from the gods and the kings of his side, said -॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)