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mahabharat 17.3.29: हे प्रभु! युधिष्ठिर! पृथ्वी पर रहते हुए आपने आकाश में नक्षत्रों और तारों के रूप में जो कुछ चमक देखी है, वह इन देवताओं के हजारों लोक हैं; उन्हें देखिए।'   |   mahabharat अध्याय 17.3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व  »  अध्याय 3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  17.3.29 
तेजांसि यानि दृष्टानि भूमिष्ठेन त्वया विभो।
वेश्मानि भुवि देवानां पश्यामूनि सहस्रश:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! युधिष्ठिर! पृथ्वी पर रहते हुए आपने आकाश में नक्षत्रों और तारों के रूप में जो कुछ चमक देखी है, वह इन देवताओं के हजारों लोक हैं; उन्हें देखिए।'
 
O Lord! Yudhishthira! While living on earth, all the brightness you have seen in the form of constellations and stars in the sky are thousands of worlds of these gods; look at them.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)