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mahabharat 17.3.28: हमने पाण्डव पुत्र युधिष्ठिर के अतिरिक्त किसी अन्य राजा के विषय में कभी नहीं सुना कि उसे भौतिक शरीर से स्वर्ग जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ हो, तथा उसने अपनी कीर्ति, तेज और सदाचार की सम्पदा से तीनों लोकों को आच्छादित किया हो।   |   mahabharat अध्याय 17.3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व  »  अध्याय 3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  17.3.28 
लोकानावृत्य यशसा तेजसा वृत्तसम्पदा।
स्वशरीरेण सम्प्राप्तं नान्यं शुश्रुम पाण्डवात्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हमने पाण्डव पुत्र युधिष्ठिर के अतिरिक्त किसी अन्य राजा के विषय में कभी नहीं सुना कि उसे भौतिक शरीर से स्वर्ग जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ हो, तथा उसने अपनी कीर्ति, तेज और सदाचार की सम्पदा से तीनों लोकों को आच्छादित किया हो।
 
We have never heard of any king other than Pandava's son Yudhishthira having had the good fortune of going to heaven in his physical body, covering the three worlds with his wealth of fame, brilliance and good conduct.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)