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mahabharat 17.3.27: स्वर्ग को गए हुए सभी महान् ऋषिगण यहाँ उपस्थित हैं, परंतु कुरुराज युधिष्ठिर उन सबके तेज को अपने यश से ढककर यहाँ विराजमान हैं॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 17.3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व  »  अध्याय 3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  17.3.27 
येऽपि राजर्षय: सर्वे ते चापि समुपस्थिता:।
कीर्तिं प्रच्छाद्य तेषां वै कुरुराजोऽधितिष्ठति॥ २७॥
 
 
अनुवाद
स्वर्ग को गए हुए सभी महान् ऋषिगण यहाँ उपस्थित हैं, परंतु कुरुराज युधिष्ठिर उन सबके तेज को अपने यश से ढककर यहाँ विराजमान हैं॥ 27॥
 
All the great sages who have gone to heaven are present here, but the Kuru King Yudhishthira has covered the glory of all of them with his own fame and is seated here.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)