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mahabharat 17.3.2: अपने भाइयों को गिरा हुआ देखकर धर्मराज युधिष्ठिर शोक में भरकर इन्द्र से इस प्रकार बोले-॥2॥   |   mahabharat अध्याय 17.3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व  »  अध्याय 3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  17.3.2 
स्वभ्रातॄन् पतितान् दृष्ट्वा धर्मराजो युधिष्ठिर:।
अब्रवीच्छोकसंतप्त: सहस्राक्षमिदं वच:॥ २॥
 
 
अनुवाद
अपने भाइयों को गिरा हुआ देखकर धर्मराज युधिष्ठिर शोक में भरकर इन्द्र से इस प्रकार बोले-॥2॥
 
Seeing his brothers fallen, Dharmaraja Yudhishthira, filled with grief, spoke to Indra thus -॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)