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mahabharat 17.3.18: धर्मराज ने साक्षात् कहा- राजेन्द्र! भरतनन्दन! तुम्हारे उत्तम आचरण, बुद्धिमत्ता और समस्त प्राणियों पर दया के कारण तुम वास्तव में योग्य पिता के उत्तम कुल में जन्म लेने वाले सिद्ध हो रहे हो॥18॥   |   mahabharat अध्याय 17.3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व  »  अध्याय 3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  17.3.18 
धर्मराज उवाच
अभिजातोऽसि राजेन्द्र पितुर्वृत्तेन मेधया।
अनुक्रोशेन चानेन सर्वभूतेषु भारत॥ १८॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज ने साक्षात् कहा- राजेन्द्र! भरतनन्दन! तुम्हारे उत्तम आचरण, बुद्धिमत्ता और समस्त प्राणियों पर दया के कारण तुम वास्तव में योग्य पिता के उत्तम कुल में जन्म लेने वाले सिद्ध हो रहे हो॥18॥
 
Dharamraj said in person – Rajendra! Bharatnandan! Due to your good conduct, intelligence and kindness towards all living beings, you are actually proving to be born in a good family of a worthy father. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)