Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 17.3.16: शरण में आये हुए को डराना, स्त्री को मारना, ब्राह्मण का धन लूटना और मित्रों के साथ विश्वासघात करना - यदि ये चार पाप एक ओर हों और भक्त का परित्याग दूसरी ओर, तो मेरी दृष्टि में यह अकेला ही चारों के बराबर है। | mahabharat अध्याय 17.3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना । mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शरण में आये हुए को डराना, स्त्री को मारना, ब्राह्मण का धन लूटना और मित्रों के साथ विश्वासघात करना - यदि ये चार पाप एक ओर हों और भक्त का परित्याग दूसरी ओर, तो मेरी दृष्टि में यह अकेला ही चारों के बराबर है।
To frighten one who has come for refuge, to kill a woman, to plunder the wealth of a Brahmin, and to betray one's friends - if these four sins are on one hand, and forsaking a devotee on the other, then in my opinion this alone is equal to all the four.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥