Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 17.3.13: इन्द्र ने कहा- वीरवर! मनुष्य जो भी दान, यज्ञ, स्वाध्याय और हवन आदि पुण्य कर्म करता है, यदि उन पर कुत्ते की भी दृष्टि पड़ जाए, तो क्रोधवश नामक राक्षस उसका फल छीन लेता है; इसलिए इस कुत्ते को त्याग दो। कुत्ते को त्यागने से ही तुम स्वर्ग को प्राप्त कर सकोगे॥13॥ | mahabharat अध्याय 17.3: युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्म आदिके साथ वार्तालाप, युधिष्ठिरका अपने धर्ममें दृढ़ रहना तथा सदेह स्वर्गमें जाना । mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इन्द्र ने कहा- वीरवर! मनुष्य जो भी दान, यज्ञ, स्वाध्याय और हवन आदि पुण्य कर्म करता है, यदि उन पर कुत्ते की भी दृष्टि पड़ जाए, तो क्रोधवश नामक राक्षस उसका फल छीन लेता है; इसलिए इस कुत्ते को त्याग दो। कुत्ते को त्यागने से ही तुम स्वर्ग को प्राप्त कर सकोगे॥13॥
Indra said-Veeravar! Whatever virtuous deeds a man does like charity, yagya, self-study and havan etc., if even a dog's sight falls upon them, then the demon called Krodhavash takes away its fruits; Therefore abandon this dog. Only by abandoning the dog will you be able to reach heaven. 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥