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mahabharat 17.2.9: भैया! जो सदैव हमारी सेवा करते थे और जिनमें अहंकार का लेश भी नहीं था, वे मद्रिनादन सहदेव किस दोष के कारण गिर पड़े हैं?॥9॥   |   mahabharat अध्याय 17.2: मार्गमें द्रौपदी, सहदेव, नकुल, अर्जुन और भीमसेनका गिरना तथा युधिष्ठिरद्वारा प्रत्येकके गिरनेका कारण बताया जाना   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व  »  अध्याय 2: मार्गमें द्रौपदी, सहदेव, नकुल, अर्जुन और भीमसेनका गिरना तथा युधिष्ठिरद्वारा प्रत्येकके गिरनेका कारण बताया जाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  17.2.9 
योऽयमस्मासु सर्वेषु शुश्रूषुरनहंकृत:।
सोऽयं माद्रवतीपुत्र: कस्मान् निपतितो भुवि॥ ९॥
 
 
अनुवाद
भैया! जो सदैव हमारी सेवा करते थे और जिनमें अहंकार का लेश भी नहीं था, वे मद्रिनादन सहदेव किस दोष के कारण गिर पड़े हैं?॥9॥
 
Brother! Who always served us and who had no trace of ego, due to which fault has this Madrinadan Sahadev fallen?'॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)