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mahabharat 17.2.3: सब पाण्डव योगाभ्यास में तल्लीन होकर बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहे थे। उनमें से द्रुपद की पुत्री कृष्णा का मन योग से विचलित हो गया, इसलिए वह लड़खड़ाकर भूमि पर गिर पड़ी॥3॥   |   mahabharat अध्याय 17.2: मार्गमें द्रौपदी, सहदेव, नकुल, अर्जुन और भीमसेनका गिरना तथा युधिष्ठिरद्वारा प्रत्येकके गिरनेका कारण बताया जाना   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व  »  अध्याय 2: मार्गमें द्रौपदी, सहदेव, नकुल, अर्जुन और भीमसेनका गिरना तथा युधिष्ठिरद्वारा प्रत्येकके गिरनेका कारण बताया जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  17.2.3 
तेषां तु गच्छतां शीघ्रं सर्वेषां योगधर्मिणाम्।
याज्ञसेनी भ्रष्टयोगा निपपात महीतले॥ ३॥
 
 
अनुवाद
सब पाण्डव योगाभ्यास में तल्लीन होकर बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहे थे। उनमें से द्रुपद की पुत्री कृष्णा का मन योग से विचलित हो गया, इसलिए वह लड़खड़ाकर भूमि पर गिर पड़ी॥3॥
 
All the Pandavas were moving very fast, immersed in the practice of Yoga. Among them, the mind of Krishna, the daughter of Drupada, became distracted from Yoga; hence she stumbled and fell on the ground.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)