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mahabharat 17.2.21: युधिष्ठिर बोले - अर्जुन को अपनी वीरता पर गर्व था। उसने कहा था कि 'मैं एक ही दिन में सभी शत्रुओं का नाश कर दूँगा'; परंतु उसने ऐसा नहीं किया; इसीलिए आज उसे पराजय का सामना करना पड़ा।   |   mahabharat अध्याय 17.2: मार्गमें द्रौपदी, सहदेव, नकुल, अर्जुन और भीमसेनका गिरना तथा युधिष्ठिरद्वारा प्रत्येकके गिरनेका कारण बताया जाना   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व  »  अध्याय 2: मार्गमें द्रौपदी, सहदेव, नकुल, अर्जुन और भीमसेनका गिरना तथा युधिष्ठिरद्वारा प्रत्येकके गिरनेका कारण बताया जाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  17.2.21 
युधिष्ठिर उवाच
एकाह्ना निर्दहेयं वै शत्रूनित्यर्जुनोऽब्रवीत्।
न च तत् कृतवानेष शूरमानी ततोऽपतत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - अर्जुन को अपनी वीरता पर गर्व था। उसने कहा था कि 'मैं एक ही दिन में सभी शत्रुओं का नाश कर दूँगा'; परंतु उसने ऐसा नहीं किया; इसीलिए आज उसे पराजय का सामना करना पड़ा।
 
Yudhishthira said - Arjuna was proud of his bravery. He had said that 'I will destroy all the enemies in one day'; but he did not do so; that is why he had to face defeat today.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)