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युधिष्ठिर उवाच
एकाह्ना निर्दहेयं वै शत्रूनित्यर्जुनोऽब्रवीत्।
न च तत् कृतवानेष शूरमानी ततोऽपतत्॥ २१॥
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - अर्जुन को अपनी वीरता पर गर्व था। उसने कहा था कि 'मैं एक ही दिन में सभी शत्रुओं का नाश कर दूँगा'; परंतु उसने ऐसा नहीं किया; इसीलिए आज उसे पराजय का सामना करना पड़ा।
Yudhishthira said - Arjuna was proud of his bravery. He had said that 'I will destroy all the enemies in one day'; but he did not do so; that is why he had to face defeat today.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥