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mahabharat 17.2.14: भैया! हमारे प्रिय मित्र नकुल, जिनकी सुन्दरता संसार में कोई समान नहीं थी, तथापि जिन्होंने अपने धर्म में कभी कोई त्रुटि नहीं होने दी तथा जो सदैव हमारी आज्ञा का पालन करते थे, वे पृथ्वी पर क्यों गिर पड़े हैं?॥14॥   |   mahabharat अध्याय 17.2: मार्गमें द्रौपदी, सहदेव, नकुल, अर्जुन और भीमसेनका गिरना तथा युधिष्ठिरद्वारा प्रत्येकके गिरनेका कारण बताया जाना   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व  »  अध्याय 2: मार्गमें द्रौपदी, सहदेव, नकुल, अर्जुन और भीमसेनका गिरना तथा युधिष्ठिरद्वारा प्रत्येकके गिरनेका कारण बताया जाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  17.2.14 
योऽयमक्षतधर्मात्मा भ्राता वचनकारक:।
रूपेणाप्रतिमो लोके नकुल: पतितो भुवि॥ १४॥
 
 
अनुवाद
भैया! हमारे प्रिय मित्र नकुल, जिनकी सुन्दरता संसार में कोई समान नहीं थी, तथापि जिन्होंने अपने धर्म में कभी कोई त्रुटि नहीं होने दी तथा जो सदैव हमारी आज्ञा का पालन करते थे, वे पृथ्वी पर क्यों गिर पड़े हैं?॥14॥
 
Brother! Why has our dear friend Nakul, who had no equal in beauty in the world, yet who never allowed any error in his Dharma and who always obeyed our commands, fallen on the earth?'॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)