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mahabharat 17.2.11: वैशम्पायनजी कहते हैं, 'हे जनमेजय!' ऐसा कहकर सहदेव को छोड़कर कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर अपने शेष भाइयों और एक कुत्ते के साथ आगे बढ़े।   |   mahabharat अध्याय 17.2: मार्गमें द्रौपदी, सहदेव, नकुल, अर्जुन और भीमसेनका गिरना तथा युधिष्ठिरद्वारा प्रत्येकके गिरनेका कारण बताया जाना   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व  »  अध्याय 2: मार्गमें द्रौपदी, सहदेव, नकुल, अर्जुन और भीमसेनका गिरना तथा युधिष्ठिरद्वारा प्रत्येकके गिरनेका कारण बताया जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  17.2.11 
वैशम्पायन उवाच
इत्युक्त्वा तं समुत्सृज्य सहदेवं ययौ तदा।
भ्रातृभि: सह कौन्तेय: शुना चैव युधिष्ठिर:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं, 'हे जनमेजय!' ऐसा कहकर सहदेव को छोड़कर कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर अपने शेष भाइयों और एक कुत्ते के साथ आगे बढ़े।
 
Vaishmpayana says, 'O Janamejaya! Having said this, leaving Sahadeva behind, Yudhishthira, son of Kunti, proceeded ahead along with the rest of his brothers and a dog.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)