Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 17.2.1: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! मन को वश में करके उत्तर दिशा में आश्रय लेने वाले योगयुक्त पाण्डवों ने मार्ग में महान पर्वत हिमालय को देखा। | mahabharat अध्याय 17.2: मार्गमें द्रौपदी, सहदेव, नकुल, अर्जुन और भीमसेनका गिरना तथा युधिष्ठिरद्वारा प्रत्येकके गिरनेका कारण बताया जाना । mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! मन को वश में करके उत्तर दिशा में आश्रय लेने वाले योगयुक्त पाण्डवों ने मार्ग में महान पर्वत हिमालय को देखा।
Vaishampayanji says – Janamejaya! Keeping their mind under control, the Yogayukt Pandavas, who took shelter in the northern direction, saw the great mountain Himalaya on the way.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥