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श्लोक  17.1.44 
ततस्ते तूत्तरेणैव तीरेण लवणाम्भस:।
जग्मुर्भरतशार्दूल दिशं दक्षिणपश्चिमाम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
हे भारतश्रेष्ठ! तत्पश्चात् वे लवण सागर के उत्तरी तट से होते हुए दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ने लगे।
 
Bharatshrestha! Thereafter, they started moving towards south-west direction through the north shore of the salt sea.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)