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श्लोक  17.1.43 
ततोऽग्निर्भरतश्रेष्ठ तत्रैवान्तरधीयत।
ययुश्च पाण्डवा वीरास्ततस्ते दक्षिणामुखा:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! इसके बाद अग्निदेव वहाँ से अन्तर्धान हो गये और पाण्डव दक्षिण दिशा की ओर मुख करके वहाँ से चले गये।
 
Bharatshrestha! After this, Agnidev disappeared there and the Pandavas moved away from there facing south.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)