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mahabharat 17.1.41: यह गाण्डीव धनुष सब प्रकार के धनुषों में श्रेष्ठ है। पहले मैंने इसे वरुण से अर्जुन के लिए माँगा था। अब मुझे इसे वरुण को लौटा देना चाहिए।॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 17.1: वृष्णिवंशियोंका श्राद्ध करके प्रजाजनोंकी अनुमति ले द्रौपदीसहित पाण्डवोंका महाप्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  17.1.41 
वरुणादाहृतं पूर्वं मयैतत् पार्थकारणात्।
गाण्डीवं धनुषां श्रेष्ठं वरुणायैव दीयताम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
यह गाण्डीव धनुष सब प्रकार के धनुषों में श्रेष्ठ है। पहले मैंने इसे वरुण से अर्जुन के लिए माँगा था। अब मुझे इसे वरुण को लौटा देना चाहिए।॥ 41॥
 
This Gandiva bow is the best among all kinds of bows. Earlier I had asked Varuna for it for Arjuna. Now I should return it to Varuna.'॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)