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mahabharat 17.1.4: अपने भाई की यह बात सुनकर कुन्तीपुत्र अर्जुन ने अपने बुद्धिमान बड़े भाई की बात का अनुमोदन करते हुए कहा, ‘समय तो समय है, उसे टाला नहीं जा सकता।’ ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 17.1: वृष्णिवंशियोंका श्राद्ध करके प्रजाजनोंकी अनुमति ले द्रौपदीसहित पाण्डवोंका महाप्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  17.1.4 
इत्युक्त: स तु कौन्तेय: काल: काल इति ब्रुवन्।
अन्वपद्यत तद् वाक्यं भ्रातुर्ज्येष्ठस्य धीमत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
अपने भाई की यह बात सुनकर कुन्तीपुत्र अर्जुन ने अपने बुद्धिमान बड़े भाई की बात का अनुमोदन करते हुए कहा, ‘समय तो समय है, उसे टाला नहीं जा सकता।’ ॥4॥
 
On hearing his brother say this, Kunti's son Arjun approved of his wise elder brother's statement by saying, 'Time is time, it cannot be avoided.' ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)