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mahabharat 17.1.39: ‘तुम्हारे भाई अर्जुन को इस उत्तम अस्त्र, गाण्डीव धनुष को त्यागकर वन में चले जाना चाहिए। अब उसे इसकी कोई आवश्यकता नहीं है।’ 39.   |   mahabharat अध्याय 17.1: वृष्णिवंशियोंका श्राद्ध करके प्रजाजनोंकी अनुमति ले द्रौपदीसहित पाण्डवोंका महाप्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  17.1.39 
अयं व: फाल्गुनो भ्र्राता गाण्डीवं परमायुधम्।
परित्यज्य वने यातु नानेनार्थोऽस्ति कश्चन॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
‘तुम्हारे भाई अर्जुन को इस उत्तम अस्त्र, गाण्डीव धनुष को त्यागकर वन में चले जाना चाहिए। अब उसे इसकी कोई आवश्यकता नहीं है।’ 39.
 
‘Your brother Arjuna should abandon this excellent weapon, the Gandiva bow, and go to the forest. He has no need for it now. 39.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)