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mahabharat 17.1.32: हे भरतश्रेष्ठ! उन सबके पीछे सुन्दर शरीर, श्यामवर्ण, कमलनेत्र वाली तथा कन्याओं में श्रेष्ठ द्रौपदी चल रही थी॥32॥   |   mahabharat अध्याय 17.1: वृष्णिवंशियोंका श्राद्ध करके प्रजाजनोंकी अनुमति ले द्रौपदीसहित पाण्डवोंका महाप्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  17.1.32 
पृष्ठतस्तु वरारोहा श्यामा पद्मदलेक्षणा।
द्रौपदी योषितां श्रेष्ठा ययौ भरतसत्तम॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! उन सबके पीछे सुन्दर शरीर, श्यामवर्ण, कमलनेत्र वाली तथा कन्याओं में श्रेष्ठ द्रौपदी चल रही थी॥32॥
 
Bharatshrestha! Behind them all was walking Draupadi, with a beautiful body, dark complexion, lotus eyes and the best among the girls. 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)