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श्लोक  17.1.30 
योगयुक्ता महात्मानस्त्यागधर्ममुपेयुष:।
अभिजग्मुर्बहून् देशान् सरित: सागरांस्तथा॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
वे सभी योगविद्या से संपन्न और त्यागधर्म का पालन करने वाले महात्मा थे। उन्होंने अनेक देशों, नदियों और समुद्रों की यात्रा की।
 
All of them were great souls who were endowed with the knowledge of yoga and followed the religion of renunciation. They travelled to many countries, rivers and seas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)