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mahabharat 17.1.27-28: जनमेजय! नागराज उलूपी की पुत्री तुरन्त ही गंगा में समा गई। चित्रांगदा मणिपुर नगरी को चली गई। शेष माताएँ परीक्षित को घेरकर लौट आईं॥ 27-28॥   |   mahabharat अध्याय 17.1: वृष्णिवंशियोंका श्राद्ध करके प्रजाजनोंकी अनुमति ले द्रौपदीसहित पाण्डवोंका महाप्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  17.1.27-28 
विवेश गङ्गां कौरव्य उलूपी भुजगात्मजा॥ २७॥
चित्राङ्गदा ययौ चापि मणिपूरपुरं प्रति।
शिष्टा: परिक्षितं त्वन्या मातर: पर्यवारयन्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! नागराज उलूपी की पुत्री तुरन्त ही गंगा में समा गई। चित्रांगदा मणिपुर नगरी को चली गई। शेष माताएँ परीक्षित को घेरकर लौट आईं॥ 27-28॥
 
Janamejaya! The daughter of the King of Snakes, Ulupi, immediately merged into the Ganges. Chitrangada went to the city of Manipur. The rest of the mothers returned surrounding Parikshit.॥ 27-28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)