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mahabharat 17.1.21-22h: भरतश्रेष्ठ! इसके बाद ब्राह्मणों से उत्सर्गकाल इष्टि का अनुष्ठान करवाकर उन सभी महाबली पाण्डवों ने अग्नि को जल में विसर्जित कर दिया और स्वयं भी महान् यात्रा के लिए निकल पड़े। 21 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 17.1: वृष्णिवंशियोंका श्राद्ध करके प्रजाजनोंकी अनुमति ले द्रौपदीसहित पाण्डवोंका महाप्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  17.1.21-22h 
विधिवत् कारयित्वेष्टिं नैष्ठिकीं भरतर्षभ॥ २१॥
समुत्सृज्याप्सु सर्वेऽग्नीन् प्रतस्थुर्नरपुङ्गवा:।
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! इसके बाद ब्राह्मणों से उत्सर्गकाल इष्टि का अनुष्ठान करवाकर उन सभी महाबली पाण्डवों ने अग्नि को जल में विसर्जित कर दिया और स्वयं भी महान् यात्रा के लिए निकल पड़े। 21 1/2॥
 
Bharatshrestha! After this, after getting the Brahmins to perform the ritual of Utsargakaal Ishti, all those great Pandavas immersed the fire in the water and they themselves set out for the great journey. 21 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)