श्री महाभारत  »  पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व  »  अध्याय 1: वृष्णिवंशियोंका श्राद्ध करके प्रजाजनोंकी अनुमति ले द्रौपदीसहित पाण्डवोंका महाप्रस्थान  »  श्लोक 18h
 
 
श्लोक  17.1.18h 
न च राजा तथाकार्षीत् कालपर्यायधर्मवित्।
 
 
अनुवाद
परंतु धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर समय के अनुसार अपने कर्तव्य को जानते थे; इसलिए उन्होंने अपनी प्रजा की सलाह के अनुसार कार्य नहीं किया॥17 1/2॥
 
But the righteous king Yudhishthira knew the Dharma or duty which was due to him according to the vicissitudes of time; therefore he did not act as per the advice of his subjects.॥17 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)