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mahabharat 17.1.18-19h: उस धर्मात्मा राजा ने नगर और जिले के लोगों को समझाकर उनकी अनुमति प्राप्त की और फिर उसने और उसके भाइयों ने सब कुछ छोड़कर महान यात्रा पर जाने का निश्चय किया।   |   mahabharat अध्याय 17.1: वृष्णिवंशियोंका श्राद्ध करके प्रजाजनोंकी अनुमति ले द्रौपदीसहित पाण्डवोंका महाप्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 17: महाप्रस्थानिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  17.1.18-19h 
ततोऽनुमान्य धर्मात्मा पौरजानपदं जनम्॥ १८॥
गमनाय मतिं चक्रे भ्रातरश्चास्य ते तदा।
 
 
अनुवाद
उस धर्मात्मा राजा ने नगर और जिले के लोगों को समझाकर उनकी अनुमति प्राप्त की और फिर उसने और उसके भाइयों ने सब कुछ छोड़कर महान यात्रा पर जाने का निश्चय किया।
 
That pious king persuaded the people of the city and the district and obtained their permission. Then he and his brothers decided to leave everything and go on a great journey.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)