Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 16.8.d4: (तुम्हारी आँखों के सामने स्त्रियों के अपहरण में देवताओं का रहस्य छिपा है।) वे स्त्रियाँ पूर्वजन्म में अप्सराएँ थीं। उन्होंने अष्टावक्र मुनि के सौन्दर्य का उपहास किया था। ऋषि ने उन्हें शाप दिया था (कि 'तुम सब मनुष्य बन जाओ और यदि डाकुओं के हाथ पड़ गए तो इस शाप से बच जाओगे।') इसीलिए तुम्हारा बल नष्ट हो गया था (ताकि डाकुओं के हाथ पड़ने पर वे उस शाप से मुक्त हो सकें), (अब वे अपने पूर्व रूप और स्थान को पुनः प्राप्त कर चुकी हैं, अतः उनके लिए शोक करने की भी आवश्यकता नहीं है)। | mahabharat अध्याय 16.8: अर्जुन और व्यासजीकी बातचीत । mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(स्त्रियश्च ता: पुरा शप्ता: प्रहासकुपितेन वै।
अष्टावक्रेण मुनिना तदर्थं त्वद्बलक्षय:॥)
अनुवाद
(तुम्हारी आँखों के सामने स्त्रियों के अपहरण में देवताओं का रहस्य छिपा है।) वे स्त्रियाँ पूर्वजन्म में अप्सराएँ थीं। उन्होंने अष्टावक्र मुनि के सौन्दर्य का उपहास किया था। ऋषि ने उन्हें शाप दिया था (कि 'तुम सब मनुष्य बन जाओ और यदि डाकुओं के हाथ पड़ गए तो इस शाप से बच जाओगे।') इसीलिए तुम्हारा बल नष्ट हो गया था (ताकि डाकुओं के हाथ पड़ने पर वे उस शाप से मुक्त हो सकें), (अब वे अपने पूर्व रूप और स्थान को पुनः प्राप्त कर चुकी हैं, अतः उनके लिए शोक करने की भी आवश्यकता नहीं है)।
(There is a mystery of the gods in the kidnapping of women in front of your eyes.) Those women were Apsaras in their previous birth. They had ridiculed the beauty of Ashtavakra Muni. The sage had cursed them (that 'you all become humans and you will be saved from this curse if you fall in the hands of bandits.') That is why your strength was lost (so that they could be freed from that curse if they fall in the hands of bandits), (now they have regained their previous form and position, hence there is no need to mourn for them either).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥