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नखकेशदशाकुम्भवारिणा किं समुक्षित:।
आवीरजानुगमनं ब्राह्मणो वा हतस्त्वया॥ ५॥
अनुवाद
'पार्थ! क्या तुमने कभी किसी ऐसे घड़े के जल से स्नान किया है जो नाखून, बाल या धोती के किनारे गिरने से अपवित्र हो गया हो? अथवा क्या तुमने कभी किसी रजस्वला स्त्री के साथ सहवास किया है या किसी ब्राह्मण की हत्या की है?
‘Partha! Have you taken a bath with the water from a pitcher that has become impure because of nails, hair or edges of your undergarments (dhoti) falling on it? Or have you had intercourse with a menstruating woman or killed a Brahmin?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥