Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 16.8.25-26: कौरवश्रेष्ठ! वृष्णि और अंधक वंश के महारथी ब्राह्मणों के शाप से भस्म हो गए हैं; अतः आपको उनके लिए शोक नहीं करना चाहिए। उन महामनस्वी महारथियों का यही भाग्य था। उनका भाग्य ऐसा ही हो गया था॥ 25-26॥ | mahabharat अध्याय 16.8: अर्जुन और व्यासजीकी बातचीत । mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्मशापविनिर्दग्धा वृष्ण्यन्धकमहारथा:॥ २५॥
विनष्टा: कुरुशार्दूल न तान् शोचितुमर्हसि।
भवितव्यं तथा तच्च दिष्टमेतन्महात्मनाम्॥ २६॥
अनुवाद
कौरवश्रेष्ठ! वृष्णि और अंधक वंश के महारथी ब्राह्मणों के शाप से भस्म हो गए हैं; अतः आपको उनके लिए शोक नहीं करना चाहिए। उन महामनस्वी महारथियों का यही भाग्य था। उनका भाग्य ऐसा ही हो गया था॥ 25-26॥
Best of the Kurus! The great warriors of the Vrishni and Andhaka clans have been burnt to death by the curse of the Brahmins; therefore, you should not grieve for them. Such was the fate of those great-minded warriors. Their destiny had become such.॥ 25-26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥