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mahabharat 16.8.2: महान भक्त और धर्म के ज्ञाता व्यास के पास पहुँचकर धनंजय ने उनके चरणों में प्रणाम किया और कहा, 'मैं अर्जुन हूँ।' फिर वह उनके पास खड़ा हो गया॥2॥   |   mahabharat अध्याय 16.8: अर्जुन और व्यासजीकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 8: अर्जुन और व्यासजीकी बातचीत  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  16.8.2 
स तमासाद्य धर्मज्ञमुपतस्थे महाव्रतम्।
अर्जुनोऽस्मीति नामास्मै निवेद्याभ्यवदत् तत:॥ २॥
 
 
अनुवाद
महान भक्त और धर्म के ज्ञाता व्यास के पास पहुँचकर धनंजय ने उनके चरणों में प्रणाम किया और कहा, 'मैं अर्जुन हूँ।' फिर वह उनके पास खड़ा हो गया॥2॥
 
Reaching Vyasa, a great devotee and knower of Dharma, Dhananjaya bowed down to his feet saying, 'I am Arjuna'. Then he stood beside him.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)