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श्लोक 16.7.76  |
स तत् कृत्वा प्राप्तकालं बाष्पेणापिहितोऽर्जुन:।
कृष्णद्वैपायनं व्यासं ददर्शासीनमाश्रमे॥ ७६॥ |
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| अनुवाद |
| समय पर ये व्यवस्था करके अर्जुन आँखों से आँसू बहाते हुए महर्षि व्यास के आश्रम में गए और महर्षि को वहाँ बैठे देखा। |
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| Having made these timely arrangements, Arjuna went to the hermitage of Maharishi Vyasa with tears flowing from his eyes and saw the Maharishi sitting there. |
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इति श्रीमहाभारते मौसलपर्वणि वृष्णिकलत्राद्यानयने सप्तमोऽध्याय:॥ ७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत मौसलपर्वमें अर्जुनद्वारा वृष्णिवंशकी स्त्रियों और बालकोंका आनयनविषयक सातवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७॥
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