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श्लोक 16.7.75  |
द्वारकावासिनो ये तु पुरुषा: पार्थमभ्ययु:।
यथार्हं संविभज्यैनान् वज्रे पर्यददज्जय:॥ ७५॥ |
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| अनुवाद |
| पार्थ के साथ आये द्वारकावासियों को उचित रूप से विभाजित करके अर्जुन ने वज्र उन्हें सौंप दिया। |
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| After properly dividing the Dwaraka residents who had come with Partha, Arjuna handed over the Vajra to them. 75. |
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