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mahabharat 16.7.63: जनमेजय! अर्जुन देखता रहा कि म्लेच्छ लोग वृष्णि और अंधक वंश की सुन्दर स्त्रियों को चारों ओर से लूट रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 16.7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  16.7.63 
प्रेक्षतस्त्वेव पार्थस्य वृष्ण्यन्धकवरस्त्रिय:।
जग्मुरादाय ते म्लेच्छा: समन्ताज्जनमेजय॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! अर्जुन देखता रहा कि म्लेच्छ लोग वृष्णि और अंधक वंश की सुन्दर स्त्रियों को चारों ओर से लूट रहे हैं।
 
Janamejaya! Arjuna kept watching as the Mlecchas looted the beautiful women of the Vrishni and Andhaka clans from all sides. 63.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)