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mahabharat 16.7.6: अपने चाचा से ऐसा कहकर अर्जुन ने दारुक से कहा - 'अब मैं शीघ्र ही वीर वृष्णिवंश के मंत्रियों से मिलना चाहता हूँ।' ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 16.7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  16.7.6 
इत्युक्त्वा दारुकमिदं वाक्यमाह धनंजय:।
अमात्यान् वृष्णिवीराणां द्रष्टुमिच्छामि मा चिरम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
अपने चाचा से ऐसा कहकर अर्जुन ने दारुक से कहा - 'अब मैं शीघ्र ही वीर वृष्णिवंश के मंत्रियों से मिलना चाहता हूँ।' ॥6॥
 
Having said this to his uncle, Arjuna said to Daruk - 'Now I wish to meet the ministers of the brave Vrishni clan as soon as possible.' ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)