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mahabharat 16.7.58: उस समूह में अनेक स्त्रियाँ थीं; इसलिए जब डाकुओं ने विभिन्न दिशाओं से उन पर आक्रमण करना शुरू किया, तब भी अर्जुन ने उनकी रक्षा के लिए हर संभव प्रयास जारी रखा।   |   mahabharat अध्याय 16.7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  16.7.58 
कलत्रस्य बहुत्वाद्धि सम्पतत्सु ततस्तत:।
प्रयत्नमकरोत् पार्थो जनस्य परिरक्षणे॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
उस समूह में अनेक स्त्रियाँ थीं; इसलिए जब डाकुओं ने विभिन्न दिशाओं से उन पर आक्रमण करना शुरू किया, तब भी अर्जुन ने उनकी रक्षा के लिए हर संभव प्रयास जारी रखा।
 
There were many women in that group; therefore, even when the bandits began attacking them from various directions, Arjuna continued to do everything in his power to protect them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)