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mahabharat 16.7.57: हाथी, घोड़े और रथों पर सवार होकर लड़ने वाले सभी वृष्णि सैनिक भी लुटेरों के हाथ पड़ गए अपने सैनिकों को वापस नहीं ला सके।   |   mahabharat अध्याय 16.7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  16.7.57 
वृष्णियोधाश्च ते सर्वे गजाश्वरथयोधिन:।
न शेकुरावर्तयितुं ह्रियमाणं च तं जनम्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
हाथी, घोड़े और रथों पर सवार होकर लड़ने वाले सभी वृष्णि सैनिक भी लुटेरों के हाथ पड़ गए अपने सैनिकों को वापस नहीं ला सके।
 
All the Vrishni soldiers fighting on elephants, horses and chariots were also not able to return their men who had fallen into the hands of the robbers. 57.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)