चकार सज्जं कृच्छ्रेण सम्भ्रमे तुमुले सति।
चिन्तयामास शस्त्राणि न च सस्मार तान्यपि॥ ५५॥
अनुवाद
जब भयंकर युद्ध छिड़ गया तो उसने बड़ी कठिनाई से धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई; किन्तु जब उसने अपने अस्त्र-शस्त्रों का ध्यान किया तो उसे उनकी बिल्कुल भी याद नहीं आई ॥55॥
When a fierce fight broke out he strung his bow with great difficulty; but when he thought of his weapons he did not remember them at all. ॥ 55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥