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श्लोक 16.7.55  |
चकार सज्जं कृच्छ्रेण सम्भ्रमे तुमुले सति।
चिन्तयामास शस्त्राणि न च सस्मार तान्यपि॥ ५५॥ |
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| अनुवाद |
| जब भयंकर युद्ध छिड़ गया तो उसने बड़ी कठिनाई से धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई; किन्तु जब उसने अपने अस्त्र-शस्त्रों का ध्यान किया तो उसे उनकी बिल्कुल भी याद नहीं आई ॥55॥ |
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| When a fierce fight broke out he strung his bow with great difficulty; but when he thought of his weapons he did not remember them at all. ॥ 55॥ |
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