तब अर्जुन ने अपने विशाल, दिव्य और कभी न पहनने वाले धनुष गांडीव पर प्रत्यंचा चढ़ाना शुरू किया और बड़ी मेहनत से वह किसी तरह उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने में सफल रहे।
Then Arjuna began to string his huge, divine and never-wearing bow, Gandiva, and with great effort he somehow managed to string it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥