श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  16.7.52 
निवर्तध्वमधर्मज्ञा यदि जीवितुमिच्छथ।
इदानीं शरनिर्भिन्ना: शोचध्वं निहता मया॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
हे धर्म को न जानने वाले पापियों! यदि तुम जीवित रहना चाहते हो तो लौट जाओ; अन्यथा मेरे द्वारा मारे जाने या मेरे बाणों से बिंध जाने से तुम इसी समय महान दुःख में पड़ोगे॥ 52॥
 
O sinners who do not know Dharma! If you want to remain alive then go back; otherwise by being killed by me or being pierced by my arrows you will be in great sorrow at this very moment.'॥ 52॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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