श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  16.7.51 
ततो निवृत्त: कौन्तेय: सहसा सपदानुग:।
उवाच तान् महाबाहुरर्जुन: प्रहसन्निव॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
आक्रमणकारियों को पीछे से आक्रमण करते देख महाबाहु कुन्तीपुत्र अर्जुन अपने सेवकों सहित सहसा पीछे मुड़े और उनसे हँसकर बोले-॥51॥
 
Seeing the invaders attacking from the rear, the mighty-armed Arjuna, the son of Kunti, suddenly turned back along with his servants and spoke to them smilingly -॥ 51॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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