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mahabharat 16.7.5: हे शत्रुनाशक! अब मैं वृष्णिवंश की स्त्रियों, बालकों और वृद्धों को साथ लेकर इन्द्रप्रस्थ ले जाऊँगा।'   |   mahabharat अध्याय 16.7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  16.7.5 
सर्वथा वृष्णिदारास्तु बालं वृद्धं तथैव च।
नयिष्ये परिगृह्याहमिन्द्रप्रस्थमरिंदम॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुनाशक! अब मैं वृष्णिवंश की स्त्रियों, बालकों और वृद्धों को साथ लेकर इन्द्रप्रस्थ ले जाऊँगा।'
 
O enemy-destroyer! Now I will take with me the women, children and old people of the Vrishni clan and take them to Indraprastha.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)