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mahabharat 16.7.48: "भाइयों! देखो, ये अकेले धनुर्धर अर्जुन और ये हतोत्साहित सैनिक हमारे ऊपर से जा रहे हैं और इस अनाथ वृद्धों और बालकों के समूह को ले जा रहे हैं (अतः इन पर आक्रमण करना चाहिए)।" ॥48॥   |   mahabharat अध्याय 16.7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  16.7.48 
अयमेकोऽर्जुनो धन्वी वृद्धबालं हतेश्वरम्।
नयत्यस्मानतिक्रम्य योधाश्चेमे हतौजस:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
"भाइयों! देखो, ये अकेले धनुर्धर अर्जुन और ये हतोत्साहित सैनिक हमारे ऊपर से जा रहे हैं और इस अनाथ वृद्धों और बालकों के समूह को ले जा रहे हैं (अतः इन पर आक्रमण करना चाहिए)।" ॥48॥
 
"Brothers! Look, this lone archer Arjun and these discouraged soldiers are passing over us and taking away this orphaned group of old people and children (so they should be attacked)." ॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)